सदगुरु खेवनहार हमारो

सद्गुरू खेवनहार हमारै।
नाम नौका लए बाह गहै कडी,बिषय बिकार भँवर सौ निकारै।
माटी देह करि दई चंदन सम,सोई चंदन सेवा हित प्यारै।
रस भजन स्वाद जीव्हा उर की दए,भटकै उर भए आप सहारै।
अंत अनंत कहै कहा लौ जीह,"प्यारी" इन कहि गयै देव हारै।

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