दूरि निकरै
दूरि निकरै
दूरि निकिरै बनहु चरावतौ गैय्या।
धूरि डारौ नैनहु सखा,भगै मिलनौ गुजरिया।
रूप रंग पिवतौ बिसरौ,सखा संगै सँवरिया।
करत मनुहार गौरि,डारौ प्रीत नजरिया।
जा जा रै जा भौरे,नाहि मानै गुजरिया।
जानौ ना हमै सुधि,बड्यौ तीखौ गमरिया।
मचावू शौर अबहु,नाहि छैडि लंगरिया।
पलोटत चिबुक बौले,तू तौ प्यारी सँवरिया।
हिय होत अधीर,देखि तीखी नजरिया।
करि बस जबरन,पकरि धरि गुजरिया।
ऐसौ बरजौरी कबहु,दैखिहै नैनन बँवरिया।
Comments
Post a Comment