युगल सौंदर्य

युगल सौदंर्य
देख सखी सींवा सुन्दरताई।
अंग गठीलौ डगमगै पग,रोंव रोवं सुघराई।
दुई कर दुई दिशिहु फहरै,दंतुली अति चमकाई।
किल किल करत हसत लाला,धावत पकरै माई।
नीलमणी मेरौ नाय नाय कहवै,करै अंगुरी देत मनाही।
कठुला कर पुनि पुनि चूमत,धूरि अंग अंगहु रमाई।
हाय मैरो कान्हा दरस बड्यौ प्यारौ,प्यारी देख लयी सिंवा ही

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