बिरह रैन

बिरह रैन
बिरह रैन काहै,बिताये न बीते।
पिय संग रहतौ,मोल ना जाणी।
गयौ पिय जी,अब पछतानी।
रह गयौ उर रीतैे कौ रीतै।
ऐ री सखियन,माधौ मिलावौ।
पीर बिरह कौ,अबहि मैटावौ।
भारी भये,गज सम रैन बीतै।
काय जी,हमै दरस न देहौ।
बिनती बारी,हमरी ना सुनहौ।
प्यारी बिनु आप,रहवै न जीतै।

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