खिझाई पद

खीझाई पद
दीजियौ हिय ही मैरो लौटाय।
बहुत दिनन मोय आप रिझायौ,खुलि गयी हिय गिरह।
बात काँच सम साँची जानी,पायौ प्रीत प्रसादी विरह।
घसी जिव्हा पिय पिय टेरतो,मिलन पिय नाय आय।
कहै सखी सुनि मौ सो ता पै,प्रीत कोऊ को जाय दिखाय।
ज्यो काची भाजी होय आधी,अधपकी छाडी मौहे।
सुहागिन नाय अभागिन छाडी,प्यारी वरी ना जगत को दोहे।

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