सियाराम विवाह पद
सियाराम विवाह पद
आजु सखी दिन मंगल भारी।
सिया राम भए एक प्राण हौ,देखन हम जा री।
भीड अवधपुर बड्यौ सुहानी,हमहु संग देखी राम जानकी।
ज्यो कुसुम कोउ भ्रमरा होये,त्यो शोभा कहत न प्रान की।
हल्ला बड्यौ री जनकपुर होयो,दूल्हा चारो भैय्या।
दुल्हिन सबही बहिनै बनिहै,सबहि लाड लडावै पितु मैय्या।
देन बधाई लोग लुगायिन आवे,आवे अवध नर नारी।
जनक राज खूब दान लुटावै,लूटत प्रजा सारी।
मंगल बेला मंगल दासी,मंगल हिय मोद सुहाये।
मंगल ही नैनन प्यारी कौ,जिन जौरी दर्शन पाये।
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