मनमोहन मैया डरपावे

मनमोहन मैय्या डरपावै।
गौरस पीयत गिरात धरनी जई,खीझी माई तऊ लाल बतावै।
कीयौ उधम अबिकै लाला तनै,जेई साँची सुनि लै कान लगायै।
तउ दै झोरी बाबा डारू तौय,डोलै घर-घर तो तै टूक मंगायै।
नाय मैय्या बाबा मिलिहै तऊ,नाय कोउ सखा सखिन बचावै।
योई सुननी मुख उतरि गयौ री,लए दौरि लला मुख अंचल छिपावै।
देखि हिय गयौ पुलक री "प्यारी",मायापति मैय्या संग माया रचावै।
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______जब लाला ने दूध पीते पीते भूमि पर गिरा दिया तब मैय्या अत्यंत खीझकर लाला से कहती है रे लाला भली प्रकार से कान लगाकर सुन ले यदि अबकी बार तैने कोई उधम किया न तो मै सच कहती हू मै तु़झे किसी बाबा की झोली मे डाल आउंगी।फिर वो बाबा तुझे घर घर ले जाकर तुझसे भीक्षा मंगवाएगा और तब तुझे न तो कोई मैय्या बाबा ही मिलेंगे और न ही तेरे कोई सखी सखा ही तुझे बचाने जाऐगे।अरी ये सुनकर लाला का मुख एकदम से उतर गया और उसने दौडकर मैय्या यशोदा के अंचल मे अपना मुख छुपा लिया है।यह देखकर प्यारी सखी का ह्रदय तो अत्यंत पुलकित हो उठा कि मायापति किस प्रकार मैय्या संग माया कर रहे है और मैय्या किस प्रकार इस मायापति को ऐसी माया रचकर डरा रही है।

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