अनुपम माधुरी

अनुपम माधुरी
लली लाल रूप अनुपम माधुरी।
सहज सलज्ज मुस्कनि,चितवनी एकहु बँकी।
कर्णफूल गुंजैहु माला,कर किंकनहु कंकी।
अधर रचिहै लालीहु,बीरी मुखै धरीही।
करधनी दुईन सजीहै,नुपुर पगा बजीही।
बसन भूषण एकैहु,तापै कौन मलूकौ लगी हौ।
नकबेसर झुकी ढुरी सी,नीको लागत लली लाल सौ।

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