राम लीला भाव

राम लीला भाव
राम लला रोटी,लै गयो कागा।
अंगना ठाडै लई माखन रोटी,आवत देखिहै भागा।
झूठौ रोटि पावेगा कागा,बड्यौ भाग तैरौ।
हमहु कागा भयौ न काहे,बेरि बेरि टेरौ।
जावत देखि रोवन लागे,दौडी आय माई पकरी।
कबहु प्यारी दरस करिहेगी,नैनन मग जोहरी।

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