युगल विवाह

युगल विवाह
करत पणिग्रहण रघुकुल मणि।
श्याम राम सिया पीत बरन कौ,दुई शोभा न जाय बरणी।
तात विदेह कर करहु धरिहै,पढत मंत्र जलहु छडिहै।
कुल लाज मूरत जानकी प्यारी,रघुबर प्यारौ मरजादा शीश धरिहै।
बलिहार भये जनकपुर नर नारी,मिल आरती करत माई न्यारी।
मोतिन मणिक बलि कर लुटावै,छबि सरबस चित्त हरण हारी।
लोग लुगाई गावत मंगल ,हियहि अति प्यारी शरमावे।
ब्याह निरख युगल छबी प्यारी,प्यारी बार बार बलि जावै।

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