सुकुमार जोरि
सुकुमार जौरि
अहौ!अतिहि सुकुमार जौरि।
निरखतौ मनहु डरपै,कैसौ कैसौ साज धरै।
कपोल कोमल भारहु,कैसौ चंदन चित्र बनै।
कैसेहु कर सुकोमल,कंकनहु भारै झुकै।
हाय! कर्ण पुष्प,धरै कैसो धरायौ नीकौ सोई लगै।
नुपुरै कैसौ भारहु पायल,पद कमल दुई धरै।
गढिहै अंग अंग कैसेहु,रज कण पादौ लगै।
पलक नेक भारी हौती,तेौ सौ बुहारती पगै।
कहा करिहौ भूषण धरायै,मलूक लागे झीनौ सजै।
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