चेतावनी
चेतावनी
मूरख मनवा जनम गमायो विरथा।
बिन काज बातन मन धरियौ,बन्यौ फिरत सुरथा।
काहू को काज कबहु न आयो,जनम विरथा गमाय जाय।
आप आप को भरत टोकरी,सब आपन च्हाये समाय।
जा दिना पंछी उडि जावै,रौवे बैठ मुंडेरी कागा।
अबहु दाना चुगन लागिहै,गमायी रैन न सौवत जागा।
जा दिन कहा मुख छिपाय घौमियौ,मांगै किये धरै कौ मौल।
कहै प्यारी दासी अबहु समय,मूरख मनवा मनहु तौल
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