कटीली कटि

कटिली कटि
कनक कटिली कटि बरछी लगै।
दई बई दुई दिशि,हिरति चलिहै कनक सिंधु।
पाछै हैरतौ रसराजौ,नैन धरिहै दुई नितम्बु।
कनक कलश दुई चुनदी औढै,लज लजातै आप आपु।
टिकिहै हटिहै नैन नाहि,पिय प्यारी शौभा बडौ पिपासु।
वेग धावति चलिहै रसिली,मिलनौ आतुर हुई जातु।
जानै दुईहि संग हौहै,जान बनिहै अनजन प्रेम हैतु।
बिबश हौत ललचाहै मौहन,चाहवै मग धरि पकरि लैतु।
मद मदिलै रस प्रीत जौरि,चरण सैबा कबहु पातु।

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