युगल कृपा
युगल कृपा
अधम करे प्यारौ कृपा भतेरी।
नैन को अंध मतिहिन बाँवरो,नाय काय नाम कौ टेरी।
ता पेई कृपा बहुत तुम किन्ही,नेक ना किन्ही देरी।
कुटिलता भरौ हिय बिषय कुमति हौ,छबि प्यारो प्राण न हेरी।
ता पै करत चेरी मोय अपनो,दया कृपामय तेरी।
बहत न नैन जरत न हिय नेक,नाय हुयो राख को ढेरी।
अधम कुटिल ता पै निर्मल किन्ही,मोय करूणा सो हैरी।
ऐसी करो किरपा अधमताई छूटै,बने चेरी चरणा सो प्यारी।
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