मौन भयो

मौन भयौ
मौन भयौ काहे प्रीतम प्यारौ।
चुप कैसी लगाय बैठिहै,काहै कहो न बैन कछु मारौ।
हसिहौ नाहि बौलिहौ नाहि,रार करनहु आय पधारौ।
टेरत बंशी धुनि काय नाहि,काहै ना रचावन रासहु आरौ।
अजी! गिरधरजी सुधि लैवौ,बिगडी दासी प्यारी कौ सँवारौ।

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