पिय निको

पिय नीकौ
आवतौ सखी पिय नीकौ मेरे।
दैखिहि दूरि लौ आवतौ,पुंज किरण अंग निकरि।
बढत ओर ओर इहा,निकटै अतिहि मुखै आयरि।
दूसर छनै पुंज कांति,हिय समाय एकौ हौयरि।
तप्त दिप्त कंचनै,लालिमा मुखै ऐसौ बिखरि।
एकमैक हौहि दुई हम,पिय रहिहै आपु बिसरि।
सुपनौ साँची आपु जानौ,दासी आपहु कै चरण बिहरि।

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