स्वरूप पद

स्वरूप पद
कैसो कहू,जा छबी की री,मन माही बस्यौ मनमोहन हाै।
पहिलै अटक्यौ नैना हिय,दूजै अलका घुंघरारी हौ।
अरी नैन मैरो अटक्यौ जातौ,अधर रसीलै लाली हौ।
कछु बात मौरी बिगार दई,याकी सुघर नासिका प्यारी हौ।
कर कंकन किंकिनी सुनत ही,मन नाचे मयूरा भारी हौ।
नुपुर रूनझुन शबद पै ही,नाचे मन मगन आली हौ।
अहो,बौल सुनत तो मरि जईहै,कहौ बचावै कौन प्यारी कौ।

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