निगौरि लाज

निगौरि लाज
निगौरी लाज, गिरिहै गाज तौपै।
दैखिहै रैन दिना मगहौ,पी सौ आवतौ काय घिरि अइयौ।
अनमिल दुई नैनहु रहिहै,पलकहु काय ढाप लइयौ।
छूवतौ भगिहै कौन दूरिहै,पाछै फिरि नैन बहत रहियौ।
दूरि दूरि भगिहै बैरनिया,हट्!दैहि मौहि निकरि जईयौ।
कियौ धरौ तैरौ भुगतिहै नैनहु,बैरि दूरि देस बसियौ।
बिनती ऐहि अजहु सुनिहौ,दासी नैनकू दरस दैयौ।

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