अनोखे किलोल

अनौखै किलोल
करत अनौखेहै किलोल लाला।
दूध पिबत शौभा छबि कौ अनोखेहै देखी।
उपरि लगत दुग्ध मूंछ बनिहि मैय्या हैसि।
लाल अधरि श्याम मुखै श्वेत दुधै शौभा ऐसी।
फिरत चटोरौ चाटै जिव्हा उपरि लैसी।
कर सौ पौछिहै लाल झूठै मूछिहै कैसी।
ऐसौ मोहनि मूरत निरखि मैय्या हिय मोद बिलसी।
दासी हिय ऐसो प्रेम लाला दैहो कदसि।

Comments

Popular posts from this blog

हरि आए संग

कहा प्राणन

तुव बिन पिया