गौरश्याम पाछै

गौर श्याम पाछै
मना भगिहै गौर श्याम पाछै।
हेरिहौ लटक लटकन,अटकै नैन दुई साँचै।
गलबाही डारै ढुरितै,चंद्र चकोर नैना आछै।
मिलन बिरहित,बिरह मिलित रहिहै हिया राखै।
लडैति लाड बहु विध,प्रीत डारिहै जुगल साँचे।
कहिहौ नौन राई बरौबर,कहै सटीक कौन बाँचै।

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