बिनती पद
गुरूदेव बिनती पद
पूजै आस तो पूजै गुरूवर।
मै मूरख लोलुप अति भारी,दये मिलवा तौ शीश धरू।
झूठै प्रेम बड्यौ जताये,बिन काज नाय बिनती करू।
मैरी बनावै तबहि पूजू,बिन बनाये ना जानू गुरू।
बहुत दिना सो भरमत रहिहै,आज देख्यौ सूरत साँची।
नाय हौहिहै प्यारी ऐसौ,बिनु सुवारथ कोऊ नाय जाँची।
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