ललिते हिय

ललिते हिय
लगईहै सखी ललिते हिय प्यारी।
नेह लाड उमगि डारै,हसिहि लगावै उर प्यारि।
सखिन कहै दैखि लेऔ,लाडली ललिते कौ आहि।
सुनिहै सखिजु जी करिहै,हिय चिपट्यौ ही राहि।
कपोल पकरि कहि सखिजु,तबै टहल जुगल कैसौ हौरि।
भौरि सी सखी बिचारिहै,साँची जुगल टहल नाहि टारि।
आरि सबमैहु नैह लाड इतनौई,तू तौ चाह्वै सबन हिय वारि।
ऐसैहु दरस करत निहारी,कौन लौटत आवन चाहरि।

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