लली अहीर की
लली अहीर की
मै लली अहीर की,कहा जानू प्रीत प्रेम।
भावे जसोदा पूत,नैनन निरख च्है।
कहा री सखी कहवै,इस ही को प्रेम।
देख हिय धक्क,रहि जाय प्राण प्यारै को।
या कौ ही कहत,रह्यौ है का जग प्रेम।
जा जिना दरस छबि,साँवली पावू नाय।
काटे कट्यै ना दिना,कहा होय जे प्रेम।
जा पे लुट्वै को,करत हिय सरबस।
ताई को कहत का री,सबहु प्रेम।
मै भोरी गुजरी,प्यारी मोय नाय पतो है।
नाय पतो मोय तो,प्रेम को कोय नेम।
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