कृपा वर्णन
कृपा वर्णन
आवै कहवे मे कैसौ किरपा।
पडत रही बिषय तम ही,आप बनि आयो उजियार।
जबहि आप बिसार दयी,आपही किन्ही पुकार।
बेरि बेरि जग भरमत होयी,तुमही किरपा करी अपार।
आय बचायी झूठौ धंध सौ,कहे सखी होयी ओ री हमार।
करिहौ ऐसौ कछु जी गिरधर,प्यारी होयी जाये प्यारी तुम्हार।
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