रँगीली बैठिहो

रंगिली बैठिहौ
रंगीली!बैठिहौ अभिसारिका बनिहि।
सुझाहै ठौर कुंज,आवत दैखिहै नाहि।
रैन अधिहि होहि,देखै मग अधीरही होहि।
चिह्न मिलिहै इहाहि,मोहन कित्त सौ आयौ नाहि।
मान बढ्यौ आवतौ,मुख फैरिहै बैठि मानिनि भहि।
आवत सैन समुझात सखी,कौन उपाय लाल लडाहि।
थक हारै नाहि मानै,सखी बचन पूरौ करनौ कहि।
संधि मिलन प्रेम कराय,निकुंज सैजि सखि गहि।
ऐसौ ही मान प्राण चलिहै,नित नव मधुरै लीला हौहि।

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