डारौ गुलाल
डारौ गुलाल
आवन मूठ भरिहै रंगिलौ डारौ गुलाल।
हुरियारै हौ हौरि कहत आवै,कर दई ललिहु लाल।
कनक कंचुकी झीनौ चूनर बिगारै,बेंदी लाल भई भाल।
अबर जबर मुख कपौल लपैटै,दई रंग सरबसहु डाल।
नाहि कहतौ औरि जौरि बिगारी,कसी चुनरी सखि बेहाल।
रंगिलौ रंग रसियाहु प्यारौ कौ,सखी छकाई लगाय गुलाल।
ऐसौ हौरी बरजौरी कौ,दैख प्यारी भई निहाल।
Comments
Post a Comment