दुख

दुख
विधना! काय बनाई पलका।
नेक न देखन देय मोहै,ढुरिहि जावे पलका।
त्रुटि पल छिन बाधा करिहै,अडि अडि जावै पलका।
जबहि पिय निहोरा करिहु,पटहु गिरावै पलका।
कहा मति मारी जो इन्ही बनाई,मोहै न भावै पलका।
बिनु पिय प्राण प्यारी अटक्यौ,बहत ही जावै पलका।

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