लय लिकुटी चलै

लए लकुटी चलै गऊए चरान।
हसि बतियात ठठात पीटत कर,चलै सखा संगी हसि हसान।
कटि बाँधै सब पोट भोज बनै,निज बैठि खोल सबहु अपराह्न।
चखै लाला सब भाँत नेह रचै,रूचि रूचि लैत सुवाद   चटकान।
साँझ फूँकी श्रृंगी टैरिही गैय्यन,करि "प्यारी" मग जोहवै दीपदान।

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