राधे करुणामय जु

राधै करूणामयी जु कृपा कीजिए,चित्त चौप टहल की मेरे दीजिए।
दासी बैठी है कबतै तेरे द्वार पै,नेक बिनती या दासी की सुन लीजिए।
गयौ जनम विरथ ना मरण भी जए,स्वास अंतिम सौ पहलै बचा लीजिए।
लोक लज्जा विषय विष विरह व्यर्थ के,इन सबकू जगह निज चरण दीजिए।
निज चरणौ की ना दासो की दासी कर,रस प्यारी पिपासा बढा दीजिए।
कहै अंतिम यही "प्यारी" कर जोरि कै,जु कछु करिकै किशोरी बुला लीजिए।
.....जु कछु करिकै किशोरी बुला लिजिए।।।

Comments

Popular posts from this blog

हरि आए संग

कहा प्राणन

तुव बिन पिया