उदित सविता लाल

उदित सविता लाल।
श्रीराधारमण नैननि डोरै,कहत निशि सब हाल।
अंजन छुटै लूटै रसही-रस,छिटकी परै लट बाल।
टूटै बंध बसन कछु खुलै,नाय पतौ गल माल।
नीची नैन दैखिहौ "प्यारी",कर जोरि झुकै भाल।

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