ना जाने क्यूँ
ना जाने क्यूँ हमेशा ,ये रास्तै हमे आजमाते है
हम किधर से भी गुजरे,फिर वही लौट आते है।
मौहब्बत है शायद,इन तन्हा राहो को भी हमसे
हर कोई कहाँ भला"प्यारी",इनसे गुजर पाते है।
क्या समझेगा कोई,टीस उस दिल की कभी ही
अश्क जिसके निकलने के पहले ही,सूख जाते है।
वक्त देते ही नही अब,हम खुद को उनके जितना
क्या हुआ?क्या है?क्या होगा?,जो सोच पाते है।
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