हरि दासी मग जोहवत

हरि दासी मग जोहवत हारी।
बसै देस हम कौन जानै,नाय जानै किस तुम देस सिधारी।
बिसर भूलै आवै खबर कोउ,भूल बिसर गयै आपहु प्यारी।
नैन कहै कछु होय ना अबतौ,हिरदै बिबश प्रीत आस बंधाई।
जग दिखा हाँसू छुप रोवू हेजी,कोऊ बात नाय बनत दिखाई।
निरमौही हम मोह फसाकै,ज्ञान पढाए नाय बात विचारी।
"प्यारी" काज कोऊ की ना छाड,धाए बात नाय आछी थारी।

Comments

Popular posts from this blog

हरि आए संग

कहा प्राणन

तुव बिन पिया