वां दिन की

वा दिन की कहा कहू री सजनी।
दिन पायन चोपन चित्त लागी,सहज हसि कही कर लए पगली।
देखि पुहुप गुंजा गुहि वेणी,इंगित करि लट लटकी सो अंगुली।
चटपटि उर सज्जा हित शयनी,संगै सखी लए जाय आजु रजनी।
सुभाग भाग मुख कौन सराहू,करि "प्यारी" नेह निज लाड सो अपनी।

Comments

Popular posts from this blog

हरि आए संग

कहा प्राणन

तुव बिन पिया