जानत अंत तुम्ही में पाए

जानत अंत तुमही मे पाय।
होय अधीर तऊही मनवा,कौन याए समुझाए।
सुमनि होय विलग तरू कितनो,जानि बिटप सोई जाय।
दिवस बरस बीतै चहै जैसौ,प्राण अंकही निसाए।
"प्यारी" नाथ पिय सचु प्यारी,सोई दिन आस लगाए।

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