ज्यू फूल से मुस्काये

ज्यू फूल से मुस्काए लला,फूल हु लजाए गए।
नैनन दमक फीकी दामिनी करी अरी,यूँ हसि हैरे कोटि जि दामिनी गिराए दए।
गन्ध सुगन्ध सरी ढापै मुख कित्त परी,जे सुवास सरस सल्लिलल बिखराए हाए।
लोकि बिलोकि शुषक जिय भाव भरी,देखि "प्यारी" प्यार सो ना कु-नजर गिराए जए।

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