अक्षय जोरी करत रस अक्षय

अक्षय जोरि करत रस अक्षय।
विरहित बदन अनृत तप्त कंचन,संयुक्त युगल मलय सम वक्ष।
अंजन विविध आयुध अति तीक्ष्ण,भेदित परस्पर सर्व करि लक्ष्य।
कहि आर्शीवचन मुदित मन सहचरी,एक सुखद सुहाग "प्यारी" स्वर रक्ष।

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