दृग खंजन

दृग खंजन अंजंन लगै वाकै।
मुख भौरा मुस्कनि रस राँची,नैननि तेज धार सौ बाँकै।
अंग टौना रंग श्याम सलौना,बृहत दोउ वपु पै मद-मातै।
मौन करै अनगिन कौतुक इन,"प्यारी" होत कहा जोई बतियातै।

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