नाथ मोहि जग से उबारौ अब

नाथ मोहि जग सौ उबारौ अब।
देखै  रंग  पिता   माता कै , देख लिए सगे संबधी सब।
भौगै भोग विषय बिष झूठै,द्वैष मोह काम क्रोध अरू मद।
रोग निरोग दरीद्दी समृद्धी , जनम सौ मरण अवस्था ढब।
प्रीति क्रौध जग रूठन मनावन,चाहै मन कछु दीन्है गए थौप।
सब सौ थकै छकै आप पुकारै,"प्यारी" पिय टेरि सुनौगै कब????
.....……..."प्यारी" पिय टेरि सुनौगे कब????

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