बिरह अगन भई तेज

बिरह अगन भई तेज।
देहि छाडि राख करि सबही,कछु ही बचिहौ न लेश।
नैननि जल सौ भभकी बढी दूनी,रैन दिवस ही हमेश।
बूझत बूझ जानि तऊ सुनियौ,जे करियौ उपाय ब्रजेश।
आनन चंद्र दिखा करौ शीतल,जीय तिरपत हौ क्षणैक।
मधै छाडौ ना तौ हसी तिहारी,जए "प्यारी" लाज सर्वैश।

Comments

Popular posts from this blog

हरि आए संग

कहा प्राणन

तुव बिन पिया