मोहे दर्शन दो घनश्याम
मौहे दरशन दो घनश्याम,बिरह की बहौत भई लीला।
नैन सुफल कीजौ होय सम्मुख,ना तौ लिजौ जोति आप,बिरह की बहौत भई लीला।
सुवास बसि करौ आप सुहासी,साँस साँस बसि जहौ नाथ,बिरह की बहौत भई लीला।
हसन कहन नुपुर रूनझुन थारी,दूजी आवै सुनाई ना बात,बिरह की बहौत भई लीला।
सब छूवन मनन सोचन बस तुम्हु,बसौ नैनन भरै जल जात,बिरह की बहौत भई लीला।
बिजुरी भाँत पल छिन गिरै मौपै,जिय होवै नित व्रज-पात,बिरह की बहौत भई लीला।
पिय दैखू सोई दिन कद निकरै, "प्यारी" मैटौ कारी रात,बिरह की बहौत भई लीला।
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