श्रीयुगल चरण

श्रीयुगल चरण नुपुर रूनझुन सुनि।
रंग सदन ड्यौढी सखि निशिही,करत बयार बीझन खैचि डोरि।
आरंभ प्रथम किंकनि कटि बोलति,मोह्य सर् चुनरि छूटन धुनि।
अरू नुपुर बजन दूजेई सुनि मौन,फैरी खंडित सुमनि सुगंध चहु दिशी।
रंग विलास करत विलसत दोउ,"प्यारी" ना रैन भान‌ कद झीनी।

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