रार ठाई अबिकै
रार ठाई अबिकै तुम मोहन।
ह्यौ सूधी राह जात गाम की,नित भाँति गैय्या हु दोहन।
तुम मैय्या भरि दए कान ही,झूठी साँचि रे बात बतावन।
जोई सुनि हम कर कान दबाए,देखि दूर हसै ठाडै हम रौवन।
पाछै पूछै वारै बात लै चुटकी,खूँटी धरि दई लाज तौ तारन।
अरू सैन चलाए नैन तीखै तै,जानि बेबस अति भौह नचावन।
सोह लेउ छैल तौ मजा चखाऊ,ना तौ कोउ"प्यारी" नाम ना जानन।
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