पूर्ण चन्द्र हृदय

पूरण चंद्र हृ्दय नभ उतरै।
पौर्णमासी कछु भई यथा सी,नैननि नैन पूरित मद उजरै।
पुलकित हृ्दय कोऊ तरंग नवी ही,चंचल चित्त चर्चित अंग उकरै।
मुस्कनि स्मित अतरंग छलक छाई,"प्यारी" अंगनि अंग गलित सुख दुखरै।

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