सखी झूलत हिंडोरा

सखी झूलत हिंडौरा श्री राधारमण।
दोउ बिटप तमाल सघन चढी वल्लरी,होय मिलित करै दोला वृंदावन।
सजै सुमनि सुगन्धि भाति नव रंगनि ,बाढी शोभा जई राजै मनहरण।
उर लाड लडैति झूलात "प्यारी" सखी,शीतल भयौ उर देखिकै हसन।

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