श्री राधा बस सब
श्री राधा बस सब कछु तिहारै।
सद्गति दुर्गति एक थारी सम्मति , नैन सब सौ थकै आप ओर निहारै।
कांकरी साँकरी ठोक पीट साध-री,हित मलयज घिसन ही राखि लेओ द्वारै।
जग फसि देखि हसि काढौ हरि प्रेयसी,निज कर देई ना तौ लकुटी ही के सहारै।
बलिहारी " प्यारी" लली दया तिहारी , देखि करूणा धन- धन जीवरा पुकारै।
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