आखर बैरी

आखर बैरी मौन हौ परै।
उर फसौ छबि पुनि पुनि धकियावै,च्यौ नाय कछु प्राण पै वरै।
जग फसौ देहि कछु कछु कल्पावै,सामन कौ जल नैन सौ झरै।
मौन धरयौ कहि नाय नाय खसियाकै,"प्यारी" पाटन बीच द्वौ मरै।

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