लाल लली नैननि द्वीप
लाल लली नैननि द्वीप जरै।
रस घृत सौ भरै दृगन दीवलै,कारी रैख अंजन बाती लगै।
द्वीप जरा दोउ देखै आपस रस,दैखत ओरि जोरी जोत जगै।
बढत बढत रस भई यौ शौभा,अंग अंग अनगिन द्वीप बनै।
जोत अनोखी तै जग-मग कुंजन,दीवाली ऐसौ "प्यारी" कुंज मनै।
"शुभ दीपावली"
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