पिय अबिके

पिय! अबिकै मिलिहो यौ।
जलधि वीची सम एकत्व हो प्यारौ,नाय विलग जानिहै द्वौ।
बनी अंजन नैन रेख ज्यौ शोभा,शोभा मिलिकै बढइयौ ह्यौ।
बिंब दर्पण ज्यौ एकम एक है,ह्यौ-कौरा दर्पण बिंबनि तौ।
सौरभ सुमन बसै एक ज्यौ छुपिकै"प्यारी" कहै उसही-विध सौ।

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