सखी प्रेम न करियो
सखी ! प्रेम ना करियौ कोय।
सौपियो ना निज उर उन हाथन , नैना उन तै मिलइयौ ना दोय।
जइयौ ना भोरी मूरत अरू बातन,नाही फसिकै सब दीयौ खोय।
राखियौ याद कौल करै नाही आवै ,परै शूली सेज इकलौ सोय।
करियौ कछुई प्रेम गली नाय जइयौ,यामै जाकै नाही लौटनो होय।
विचारी दशा "प्यारी" बचियौ प्रेम सौ, नाही लिजौ बबूल उर बोय।
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