ड्योढ़ी रँग सदन
ड्यौढी रंग सदन जगै ठाडै।
सेज उतरिकै अरूझै चलिहै,पग धरै सुधै कदि आडै।
रूकै देहरी रूकिकै मुस्काए,जई झौंके पौन दए छाडै।
बसन अलक बिथुरेई उडिहै,दीखै अंग रति चिन्ह गाढै।
दीन्ही लाड़िली अतिही लजाई,पिय हसिकै लली ओरि बाढै।
हाँसी सखियन उर हरषाकै,"प्यारी" लडैति लडावै सदा लाडै।
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